सोमवार, 31 जुलाई 2017

अच्छे दिनों में सेंसेक्स

सेंसेक्स प्रसन्न है। सेंसेक्स के आंगन में बहार लौट रही है। सेंसेक्स की मजबूती का सहारा पाकर अर्थव्यवस्था भी चहकने के मूड में दिखती है।

दलाल पथ पर भी चहल-पहल पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है। वहां से गुजरता हर शख्स एक नजर उठाकर सेंसेक्स के बोर्ड पर जरूर डालता है ताकि बढ़त का भरोसा कायम रह सके। स्टॉक मार्केट में भरोसा बड़ी चीज है। भरोसा और उम्मीद के दम पर ही तो निवेशक शेयर बाजार के समंदर में निरंतर गोते लगाते दिख जाते हैं। हालांकि कड़वा सच तो यही है कि इस समंदर में जो एक दफा डूबा फिर बचकर बाहर न आ पाया फिर भी ऐसा कभी हुआ है कि राह से गुजरने वाला शराबी मैखाने का पता न पूछे।

कहने वाले कह रहे हैं कि सेंसेक्स के चेहरे पर प्रसन्नता की असली वजह जीएसटी का लागू होना है। जीएसटी सेंसेक्स के लिए रामबाण साबित हुई है। असर देखिए कि निफ्टी दस हजार के पार निकल चुकी है। और, सेंसेक्स का टारगेट पचास हजार का आ रहा है।

हालांकि ये सब खबरें हैं। खबरें अफवाह बनकर अपना थोड़ा-बहुत असर तो दिखाती ही हैं। खबरें तो तब ये भी आईं थीं- जब चांदी ने पिचत्तर हजार का आंकड़ा पार किया था- कि अब इसे एक लाख होने से कोई नहीं रोक सकता। बाद में फिर क्या हुआ जग-जाहिर। वैसे, सट्टाबाजार को चलाने में खबरें बड़ी मारक भूमिका निभाती हैं। मामला पल में अर्श पर, पल में फर्श पर टाइप हो जाता है।

मगर सेंसेक्स की इस बार की बढ़त कुछ कहती है। ऐसा लगता है, आम आदमी से कहीं ज्यादा प्रोजीटिव मोड में सेंसेक्स ने जीएसटी को लिया है। पूरे हिंदुस्तान भर में एक सेंसेक्स ही है जिसे जीएसटी पूरा समझ आया है। वरना, हम जैसे कु-पढ़ तो जीएसटी का ‘जी’ ही समझ-समझ कर हार गए।

चलिए खैर कोई नहीं। इंसान को न सही एक निर्जिव को ही जीएसटी के अर्थ-मायने समझ आ गए। बड़ी बात है। सेंसेक्स के चेहरे पर बनी खुशी का लाभ इंसानों को भी मिले असली बात तो तब है। वरना, ये तो अपनी ढपली, अपना राग टाइप मामला बैठेगा।

1 टिप्पणी:

anshumala ने कहा…

आम आदमी को न सेंसेक्स समझ आया न जीएसटी आएगी |