मंगलवार, 8 अगस्त 2017

निफ्टी, तुम्हें अभी बहुत ऊपर जाना है

मैं सेंसेक्स और निफ्टी दोनों का समान प्रसंशक हूं। यह बात सही है कि मैंने जिस प्रखरता के साथ सेंसेक्स पर लिखा, उतना निफ्टी पर नहीं लिख पाया। निफ्टी पर न लिखने के पीछे किसी प्रकार का किंतु-परंतु नहीं है। पर इससे मेरा निफ्टी के प्रति स्नेह कम नहीं हो जाता। मेरा बचपन से मानना रहा है कि स्टॉक मार्केट में जितना ‘पोटेंशल’ सेंसेक्स का है, निफ्टी का भी कम नहीं।

तमाम बाधाओं को दुलत्ती मार निफ्टी ने जिस वीरता के साथ दस हजार के पहाड़ को पार किया है, वाकई, काबिले-तारीफ है। निफ्टी ने न केवल स्टॉक मार्केट, दलाल स्ट्रीट का मान बढ़ाया है अपितु अपने निवेशकों के दिलों में भी महत्तवपूर्ण जगह बनाई है। वरना, तो अब तलक हर जीत पर सेंसेक्स के ही ‘जयकारे’ लगा करते थे। उसे ही ‘बधाईयां’ दी जाती थीं।

देखा जाए तो स्टॉक मार्केट में सेंसेक्स के मुकाबले निफ्टी का सफर भी इतना आसान नहीं रहा। न जाने कितनी दफा वो सेंसेक्स की भारी-भरकम गिरावटों के बीच दबी-कुचली गई। खूब ध्यान है, आज से कोई 18-19 साल पहले निफ्टी 800-900 के बीच झूलती रहा करती थी। जहां कोई निगेटिव खबर आई नहीं कि निफ्टी सिकुड़कर और छोटी हो जाती थी। हालांकि ऐसी ही चोटें सेंसेक्स ने भी खूब खाईं हैं। पर वजन में वजनदार होने के नाते सेंसेक्स फिर भी झेल जाता था।

बावजूद तमाम दबावों के संघर्ष दोनों करते रहे। संघर्ष का सुफल आज हमारे सामने है।

मेरे लिए निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही न केवल ‘वंदनीय’ बल्कि ‘प्रेरणास्पद’ भी हैं। जीवन में मुझे जब भी प्रेरणा लेने की आवश्यकता महसूस होती है, मैं किसी महा या सिद्धपुरुष से नहीं बल्कि निफ्टी से लेता हूं। निफ्टी ने मुझे एक बहुत ही छोटे लेबल से ठीक-ठाक ऊंचाई पर जाने का मार्ग बताया-दिखाया है।

ध्यान रहे, दस हजार का आंकड़ा निफ्टी के लिए आदि-अंत नहीं है। हालांकि मार्केट में तो चर्चे पंद्रहा से बीस हजार तक जाने के भी हैं। ये तो खैर जितने मुंह उतनी बातें वाला हिसाब-किताब है। मगर सच यही है कि अभी निफ्टी को बहुत ऊपर बहुत ही ऊपर जाना है। देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ निवेशकों के पोर्ट-फोलियों में भी चांद-सितारें लगाने हैं। दुनिया को यह बता देना है कि मुकाबले में निफ्टी भी किसी से कम नहीं।

बहरहाल, उस लेबल तक पहुंचने के लिए निफ्टी को मेरी अग्रिम शुभकामनाएं रहेंगी।

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